शायरी – राहत नहीं उस चांद को, हर आग को जो सह गया

love shayari hindi shayari

मेरा दर्द भी बेरंग था जो आंसुओं में घुल गया
था इश्क का ये खून जो मेरी नजर से बह गया

इस जहान की गली-गली ईमान से वीरान थी
इस पाप की नगरी में ये दिल कहीं पे मर गया

सूने महल की सेज पर तन्हा सा बादशाह था
जब लुट गई रियासतें, कोई साथ भी न रह गया

मेरे दर्द के चिराग को जलने से है फुरसत कहां
राहत नहीं उस चांद को, हर आग को जो सह गया

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari