शायरी – अपना दिले-नादान लेकर हम जबसे शहर गए

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अपना दिले-नादान लेकर हम जबसे शहर गए
मीठी बातों की आड़ में सब धोखा कर गए

हर घर में एक दुकान है, रिश्ते बिकते हैं जहां
दिल की जगह में सब यहां रुपया पैसा भर गए

बाजार की भीड़ में हैं जगमगाते जिस्म बहुत
ये हसीं नजारे सबकी नजर को अंधा कर गए

अपना वतन मिला नहीं ऐसे शहर में कहीं
जिसकी तलाश में जीते जीते हम तन्हा मर गए

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari