शायरी – जो जवां होके महक जाए वो शबाब हुए

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जिसने मिट्टी से महक पाई वो गुलाब हुए
जो जवां होके महक जाए वो शबाब हुए

सोये पत्थर को जगाना आसां नहीं था
इसी कोशिश में तो ठोकरें बेहिसाब हुए

मेरा मंजर जो सुनहरा था, अब बेरंग हुआ
जैसे दरिया भी बिना चांद के उदास हुए

आग में हाथ जलाया तो मुझे खाक मिला
फिर हथेली पे माजी के कुछ दाग हुए

माजी – अतीत, past

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari