शायरी – जो रह गए थे दरम्यां वो फासले क्या थे

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जो रह गए थे दरम्यां वो फासले क्या थे
मसला-ए-दिल सुलझा नहीं, वो मामले क्या थे

तेरे इश्क में सूरत से मैं उदास हो गया
जिसे देखकर तू निखर गई वो आईने क्या थे

अपने ही कयामत में बसर कर रहा हूं मैं
जो दर्द बनके जी लिए वो मरहले क्या थे

शरमाए हुए आए थे जो मेरे दर के सामने
सब लूट के मेरा चल दिए, वो हुस्न भी क्या थे

(मरहले- मंजिल)

©RajeevSingh #love shayari

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