शायरी – ये रात जा चुकी है, कहां आप रह गए हैं

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शोले भी बुझ गए हैं, शबनम भी बह गए हैं
ये रात जा चुकी है, कहां आप रह गए हैं

मय से भरी सुराही अब खाली हो गई है
आखिर में ये पैमाने प्यासे ही रह गए हैं

ये मेरा सनमखाना बेघर का आशियां है
अब ऐसी खलाओं में फकत दर्द रह गए हैं

जख्मी हुई चिड़िया को तू क्या उड़ा सकेगा
जब तेरी हथेली पे कांटे ही रह गए हैं

©RajeevSingh #love shayari

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