शायरी – ये नजर-नजर की बात है कि किसे क्या तलाश है

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ये नजर-नजर की बात है कि किसे क्या तलाश है
तू हंसने को बेताब है, मुझे रोने की ही प्यास है

तुम फूल देखते हो जब, रख लेते हो उसे तोड़कर
मेरे लिए हर फूल इस कुदरत का हसीं ख्वाब है

तुम चाहते हो लोग तुम्हें देखें और तारीफ करें
हम सोचते हैं दुनिया में वो करता झूठी बात है

इन चांद-तारों में है क्या, इन हसीं नजारों में है क्या
उसे क्या पता जिसकी नजर पर दौलत का नकाब है

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

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