शायरी – दर्द उठता है तो बस ये ही दुआ करता हूं

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सांस रुक जाए मगर आंखें कभी बंद न हो
मौत आए भी तो तुझे देखने की जिद खत्म न हो

दर्द उठता है तो बस ये ही दुआ करता हूं
तेरे दिल में मेरे खातिर कोई भी जख्म न हो

जिन चिरागों को जलाने के लिए आग नहीं
उनकी लाशों पर कभी जुगनुओं का जश्न न हो

जिंदगी तुमसे मेरा खून का रिश्ता है मगर
फिर से मेरा ऐसे रिश्तों में कभी जन्म न हो

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

One thought on “शायरी – दर्द उठता है तो बस ये ही दुआ करता हूं”

  1. kahan koi mila ki jispe duniya luta dete, sabhi ne dhokha diya kis2 bhula dete, ahle mohabbat ka gam to apne dil me hee rakhte hai,agar isko waya ksrte to saari duniya rula dete.

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