शायरी – जो आँखें न उठा सके मेरे दर्द की तरफ

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जब रो रहे थे हम अपने हालात पर
सब मुस्कुरा रहे थे जाने किस बात पर

हम जिंदगी की आग में यूं झुलस गए
कि यकीं नहीं होता अब बरसात पर

क्यूं हम कहीं पे जाएंगे तेरी तलाश में
जब घर नहीं बसाना दिले-बर्बाद पर

जो आंखें न उठा सके मेरे दर्द की तरफ
वो कान क्या देंगे मेरी फरियाद पर

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

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