हीर रांझा -9 – हीर की गद्दी पर रांझा

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नाव पर लाकर रांझा को सबने हीर की गद्दी पर बिठा दी।

रांझा गद्दी की खूबसूरती देखकर इसके बारे में पूछने लगा तो लोगों ने बताया कि यह एक बेहद खूबसूरत लड़की इस पर बैठती है। वह मीर चूचक की बेटी है। माहताब से भी ज्यादा चमकता हुस्न है उसका। उसके हुस्न के कयामत से परियों की रानी तक खौफ खाती हैं। एक बार जो उसके जादू में गिरफ्तार हुआ, वह धरती पर आवारा हो गया। वह सियालों के लिए गर्व करने की चीज है। उसका नाम हीर है।

रांझा ने बिना किसी भेदभाव के, बड़े-छोटे, अमीर-गरीब; सबसे उस गद्दी पर बैठने की गुजारिश की। वे सब रांझा के आस-पास उसी तरह बैठ गए जैसे कि शम्मे को चारों तरफ से परवाने घेर लेते हैं।

अब लुड्डन रांझा को उस पार न ले जाने की बात को यादकर पछता कर रहा था। वह कहने लगा, ‘मुझे डर लगने लगा था कि कहीं यह डाकू बांसुरी के जादू से मेरी बीवी को लूटकर न ले जाए।’

नाव पर लोग रांझा से उसकी जिंदगी के बारे में पूछने लगे। कहां से आए हो? घर क्यों छोड़ दिया? तुम तो बड़े कमजोर दिख रहे हो, क्या किसी ने तुमको कुछ खाने-पीने को नहीं दिया?

रांझा ने सबको अपनी पूरी कहानी सुनाई और कहा, ‘मैं अपने मां-बाप का दुलारा था लेकिन खुदा को यही मंजूर था जो अब मेरे साथ हो रहा है।’

नाव के उस पार जाने के बाद लोग गांवों में रांझा का किस्सा सुनाने लगे। उसके बांसुरी के जादू के बारे में सबको बताने लगे। वे कहते,’जब वह बोलता है तो उसकी जुबां से फूल झड़ते हैं। लुड्डन की बीवियां तो उससे प्यार करने लगी और वह हीर की गद्दी पर बैठा।’  – कहानी आगे पढें

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