हीर रांझा – 17 – दोनों के इश्क का भेद खुला

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चरवाहे रांझे के इश्क में हीर के गिरफ्तार होने की खबर गांव में तेजी से फैली। यह भी सभी जान गए कि हीर रोज रांझे से मिलने जाती है। हीर की मां तक बात पहुंची तो वह बहुत गुस्से में आई। कैदु ने भी हीर को जंगल में रांझा के साथ देख लिया।

हीर जंगल से जब वापस लौटी तो मां ने डांटते हुए कहा, ‘गांववालों के ताने सुनकर हम जहर का घूंट पीकर रह गए। तू मेरे कोख से पैदा नहीं होती तो अच्छा होता। अगर तुम अपनी दुष्टता नहीं छोड़ोगी तो पिता चूचक और तुम्हारा भाई सुल्तान तुम्हारे टुकड़े-टुकड़े कर देंगे।’

हीर ने जवाब दिया, ‘सुनो मां, मेरी सांसें जब तक चल रही हैं, मैं रांझा को नहीं छोड़ सकती। मैं भले ही मार दी जाऊं। इस तरह से मरने के बाद मैं लैला-मजनू जैसे आशिकों से मिल पाऊंगी जो इश्क के खातिर कुर्बान हो गए।’

हीर की बात सुनकर मां का गुस्सा सातवें आसमान पर था। मां ने कहा, ‘अब तक मां-बाप ने तुम पर जो प्यार लुटाया, उसका यह सिला तुम दे रही हो बेटी। हमने सोचा था कि अपनी बगिया में हमने गुलाब का पौधा उगाया है लेकिन तुम तो कांटों की झाड़ निकली। तुम रांझा से रोज मिलने जाती हो और उसके लिए खाना भी ले जाती हो। मां-बाप की हिदायत का तुमने जरा भी ख्याल नहीं रखा। जो बेटियां काबू में नहीं रहती, लोग उनको वेश्या कहते हैं।’

हीर ने अपनी मां को बातों को अनसुना कर दिया और रांझा से मिलने रोज जंगल में जाती रही। इधर लंगड़ा कैदु हीर के पिता चूचक के कान भरता रहा और हीर पर पाबंदी लगाने के लिए उकसाता रहा। वह जंगल में हीर और रांझे पर जासूसों की तरह नजर रखने लगा।

वह छुपकर हीर का पीछा करता। आखिरकार कैदु को अपनी कुटिल योजना को अंजाम देने का मौका मिल गया। हीर रांझे के लिए पानी लाने के लिए नदी की ओर गई। रांझा अकेला बैठा था तभी कैदु फकीर के वेश में उसके पास आया और खुदा का नाम लेकर मांगने लगा। रांझा ने उसे फकीर समझकर आधा खाना उसे दे दिया। कैदु ने फकीरों की तरह उसको दुआ दी और खाना लेकर गांव की ओर चल पड़ा।

जब हीर नदी से पानी लेकर वापस लौटी तो उसने रांझा के पास आधा खाना देख उससे पूछा। रांझा ने बताया कि एक लंगड़ा कर चलने वाला फकीर उसके पास आया था जिसे उसने आधा खाना दे दिया।

हीर सारा माजरा समझ गई। उसने रांझा से कहा, ‘तुम्हारी बुद्धि कहां चली गई है? वह फकीर नहीं मेरा दुष्ट चाचा कैदु था जो मुझे बर्बाद कर देना चाहता है। मैंने तुमको पहले ही सावधान किया था। कैदु शैतान है। वह पति-पत्नियों और मां-बेटियों में फूट पैदा कर देता है। वह बहुत बड़ा पाखंडी है। वह सुबह को अपने दोनों हाथों से जिस चीज को संवारता है, रात को अपनी लात से उसे उजाड़ देता है। वह हमारे प्यार भरी दुनिया में जहर घोल देगा।’

रांझा ने हीर को जवाब दिया, ‘कैदु अभी-अभी यहां से गया है और वह बहुत दूर नहीं गया होगा। जाओ और कुछ भी करके उसे रोको।’

हीर का दिल कैदु के खिलाफ नफरत और गुस्से से भर आया और वह उसे पकड़ने के लिए दौड़ी। वह जल्दी ही कैदु के पास पहुंच गई और बाघिन की तरह उसपर टूट पड़ी। हीर ने कैदु की फकीरी टोपी उतार फेंकी, मनकों की माला तोड़ डाली। हीर कैदु को बेतहाशा पीटने लगी जैसे पत्थर पर धोबी कपड़ा पटकता है। कहानी आगे पढ़ें

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