जख्म शायरी

शायरी – न आंखों को चैन न जिगर को करार आया

शायरी न आंखों को चैन न जिगर को करार आया मेरे हिस्से मोहब्बत में बस इंतजार आया वो मिल न सकी फिर भी उससे मिलते रहे खयालों में उसपे में सबकुछ निसार आया

love shayarihindi shayari

न आंखों को चैन न जिगर को करार आया
मेरे हिस्से मोहब्बत में बस इंतजार आया

वो मिल न सकी फिर भी उससे मिलते रहे
खयालों में उसपे मैं सबकुछ निसार आया

बरसता रहा गम आंखों से सावन की तरह
हर मौसम मेरे लिए दर्द की फुहार लाया

अब न रहा कुछ भी इस जमाने से वास्ता
तुझे खोकर दुनिया के रिश्ते बिसार आया

बिसारना- भुलाना

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

Advertisements
Advertisements