शायरी – कभी गली में वो दिखती नहीं

new prev new next

इश्क का ये उदास मंजर है
दर्द सीने में गड़ा खंजर है

वो हुस्न पिंजरे में बंद पंछी है
इधर दिल रोता घर के अंदर है

आंखें झरने की तरह गिरती हैं
जिस्म में भर गया समंदर है

कभी गली में वो दिखती नहीं
ये उम्मीद भी कितनी बंजर है

©RajeevSingh

One thought on “शायरी – कभी गली में वो दिखती नहीं”

Comments are closed.