शायरी – जुदा होकर ये दिल तुमसे और जुड़ गया है

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दुनिया में भले न हो मेरा कहीं ठिकाना
तेरे दिल के करीब हो मेरा ये आशियाना

मेरी तरफ जानेजां गुनाहों की नजर फेरो
हर बार जुर्म करो तुम और भरूं मैं जुर्माना

जब सदियां बीत गईं तेरा इतंजार करते
फिर वक्त का ही आशिक बना तेरा दीवाना

जुदा होकर ये दिल तुमसे और जुड़ गया है
अब जख्म ही दे रहा है मुसकाने का बहाना

©RajeevSingh

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