शायरी – नशीली रातों को तुझपे नाज आज भी है

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हसीन वादियों में तेरी याद आज भी है
इन फिजाओं में तेरी आवाज आज भी है

कैसे भूलेंगे लोग आसानी से मोहब्बत को
दुनिया में शाहजहां का ताज आज भी है

दिलवालों का सर कलम कर देने के लिए
सदियों का यह दुश्मन समाज आज भी है

आंख लगती है तो तेरे ही ख्वाब आते हैं
नशीली रातों को तुझपे नाज आज भी है

©RajeevSingh

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