शायरी – मेरे मरने की खबर पाने की बेकरारी में

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हम बंद करके दिल का कारोबार बैठे हैं
बेदिल जहां से रुखसती को तैयार बैठे हैं

पूछते हैं वो, लाश घर से कब निकलेगी
मेरे दरवाजे पर कुछ अजीज यार बैठे हैं

मौका देखकर मेरा कत्ल कर देने को
आसपास न जाने कितने रिश्तेदार बैठे हैं

मेरे मरने की खबर पाने की बेकरारी में
खिड़की पे देर तक मेरे दिलदार बैठे हैं

©राजीव सिंह शायरी

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