शायरी – हम करते रहे वफा, वो धोखा देना नहीं भूला

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मेरा यार कभी मुझसे यारी निभाना नहीं भूला
जब भी मिला मौका, दिल दुखाना नहीं भूला

उसकी फितरत में बेवफाई इस कदर बसी थी
हम करते रहे वफा, वो धोखा देना नहीं भूला

दूध पिलाता रहा मैं एक आस्तीन के सांप को
आखिरकार वो एक दिन मुझे डसना नहीं भूला

जब देखा मासूमियत में छिपा खतरनाक चेहरा
जिंदगीभर मैं उस यार का बुरा सपना नहीं भूला

©rajeev singh shayari

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