शायरी – अफसोस तो रहता है तुमको खो देने का

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दिल के दर्द से निकले हुए तराने नहीं बनते
मिल जाते अगर तुम तो अफसाने नहीं बनते

जो जमाने के रिवाजों ने तुम्हें छीना न होता
तो जंजीरों को तोड़ने वाले दीवाने नहीं बनते

मगर अफसोस तो रहता है तुमको खो देने का
वरना आशियाने के अंदर मयखाने नहीं बनते

जिंदगी जीने का ये रोग तुम ही तो लगाते हो
इसलिए चाहकर भी मरने के बहाने नहीं बनते

©rajeev singh shayari

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