शायरी – जहां दो दिल मिले, है दुनिया में वो दस्तूर कहां

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है अंधेरा बहुत जिंदगी में मगर तेरा नूर कहां
है अधूरी मेरी कहानी और तुम हो दूर कहां

फासला है कितना इसका मुझे अंदाजा नहीं
थक चुका मैं इधर और उधर तू मजबूर कहां

अब तेरी झलक भी पाने की उम्मीद क्या हो
जहां दो दिल मिले, है दुनिया में वो दस्तूर कहां

इस दिलासे पर ही जिंदा है ये तनहा जिंदगी
भुगत रहा जो सजा, इसमें तेरा मेरा कसूर कहां

©राजीव सिंह शायरी

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