हीर रांझा – 32 – सबको झांसा देकर दोनों हुए फरार

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रांझा हीर के घर आया तो वह बेहोश पड़ी थी। वहां औरतें एक दूसरे से कह रही थीं, ‘देखो खेरा जिसे बदनाम कर रहे थे, दरवाजे से जिस फकीर को भगा रहे थे; आज अपनी बहू की जान बचाने की नौबत आई तो उसी को पकड़ लाए हैं। अब हीर की जान बच जाएगी।’

रांझा ने आदेश दिया कि हीर को किसी एकांत कोठरी में ले जाया जाय जहां वह मंत्र पढ़ेगा। उसने कहा कि जहरीले सांप के विष का असर खत्म करने में वक्त लगेगा। वहां सेहती के अलावा किसी को रहने की इजाजत उसने नहीं दी।

सेहती की योजना कामयाब हुई। रांझा हीर को वहां से भगा ले जाने के लिए ही आया था। जब आधी रात हुई तो रांझा हीर के साथ भागने को तैयार हुआ। सेहती ने कहा, ‘जोगी, मैंने अपने परिवार की इज्जत को दांव पर लगाकर तुमको हीर से मिलवाया है। अब मुझे भी मुराद से मिलवा दो।’

सेहती को मुराद से मिलवाने की खातिर रांझा खुदा से दुआ मांगने लगा और उसका असर भी हुआ। न जाने कहां से मुराद अपनी ऊंट के साथ वहां पहुंचा। उसने कहा, ‘पता नहीं मेरे ऊंट को अचानक क्या हो गया। हम कहीं और जा रहे थे और ऊंट पर बैठे बैठे मुझे नींद आ रही थी। ऐसा लगा जैसे आसमान से कोई आवाज आई जिसे सुनकर मेरा ऊंट आंधी की तरह दौड़ता हुआ यहां आ पहुंचा। अब मैं समझा कि क्या बात थी। चलो हम सब यहां से भाग चलें।’

हीर-रांझा, सेहती-मुराद वहां से फरार हो गए। सुबह हुई तो सबने पाया कि चारों गायब थे। देखते देखते गांव में हल्ला मचने लगा। सब कहने लगे, ‘हीर और सेहती ने पूरे गांव की इज्जत मिट्टी में मिला दी। हमारी तो नाक कट गई। अब पूरी दुनिया हम पर थू थू करेगी।’

खेराओं ने अपने हथियार निकाल लिए। सब चारों को खोजने निकल पड़े। मुराद सेहती के साथ भागने में सफल रहा लेकिन रास्ते में एक जगह थककर चूर हुए हीर रांझा की नींद आ गई। वहां राजा अदाली का राज चलता था। खेरा वहां आ धमके और रांझा को उन्होंने बुरी तरह पीटा और हीर को ले गए। अब रांझा राजा अदाली के दरबार में इंसाफ मांगने पहुंचा।

वह राजभवन के बाहर जोर जोर से रोने चिल्लाने लगा। जब शोरगुल राजा के कानों तक पहुंची तो उनको नौकरों से पता चला कि कोई जोगी इंसाफ के लिए गुहार लगा रहा है। कहानी आगे पढ़ें।

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