शायरी – इश्क की आग में जमीं आसमां जल गया

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मेरी जिंदगी जल गई, मेरा मकां जल गया
इश्क की आग से जमीं आसमां जल गया

तनहा दिल की चिंगारी को सुलगाता रहा
इसी कोशिश में मेरा पूरा कारवां जल गया

बगीचे को अचानक लपटों ने घेर लिया था
एक परिंदे को बचाते हुए बागबां जल गया

दहकते रहे उम्रभर होठों पे खामोश लफ्ज
उसे सहते हुए एक दिन वो बेजुबां जल गया

©राजीव सिंह शायरी

One thought on “शायरी – इश्क की आग में जमीं आसमां जल गया”

  1. Suna h pyaar karne wale bade ajeeb hote h
    Khushi ke badle gam naseeb hote h
    A mere dost mohhbat na kar kisi se
    kyon ki pyaar karne wale bade badnseeb hote h.meri kismat

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