शायरी – दिल जमाने को समझेगा आखिर कब

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ठोकरें खाना बंद करेगा आखिर कब
दिल जमाने को समझेगा आखिर कब

मुद्दतों से मुझे ख्वाब दिखा रहा है वो
सारे ख्वाब तोड़ जाएगा आखिर कब

हाल रिश्तों का एक दिन बुरा होते देखा
तू भी तो मुझे धोखा देगा आखिर कब

आईने से कई बार ये पूछती रहती हूं मैं
मेरा वजूद मुझे तलाशेगा आखिर कब

©राजीव सिंह शायरी