Tag Archives: प्रेम शायरी

ढ़ाई अक्षर प्रेम का पढ़के

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बादल के टुकड़े हैं इतने
धरती पे प्यासे हैं कितने

जिस्म तो बस एक मिला है
पाया अंदर रूप हैं कितने

ढ़ाई अक्षर प्रेम का पढ़के
रह गए तन्हा ही कितने

हैरां हूं मैं गिनते-गिनते
आईने में तस्वीर हैं कितने

©RajeevSingh

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