100 दिलकश शायरी

दिलकश शायरी 1-10

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दुनिया में तेरा हुस्न मेरी जां सलामत रहे

जबसे मिला हूं तुमसे यही सोचता हूं मैं

तू ही तू मुझको याद आया

ख्वाहिशों की प्यास कभी बुझ नहीं पाती

आज फिर से दिल में तेरी खुशबू आई है

लोग कहने लगेंगे आंसू को लहू

मुझे दर्द की तलाश में तुम मिल ही गए

हम तेरी मुहब्बत में ऐसे जिए जाते हैं

सच्ची मुहब्बत दिल से मिटा दे, किसके बस की बात है

कितने दुख सहे तेरे इश्क में

दिलकश शायरी 11-20

दिल में दर्द है और आंसू भी

कैसे हो गई तेरी वफा कम

इश्क की खाक में मिलाया खुद को

हम चल पड़े दिल की राह पर

ऐ मेरे दिल ऐसे ख्वाब सजा

तेरी आंखों से हमें इश्क हुआ

हर निशां, हर जख्म में तुम हो

इश्क और बंदगी के आंसू हैं

खामोशियों को जो पढ़ता नहीं है

अपने खयालों में देखा जिनको

दिलकश शायरी 21-30

जब से आंखों पे छाए हो

मुसकाएं आखिर कैसे, दिल तो टुकड़ा-टुकड़ा है

दर्द दिल में और उदासी में

कांटों से दिल जोड़ आए

एक खामोश मुसाफिर सा कोई

है अमावस सी जिंदगी तन्हा

राह पे जब तू साथ न आया

तन्हाई ही तमन्ना है

तेरे बिन दिल कहां जाए

जख्म तो सब देते हैं मगर

दिलकश शायरी 31-40

दो निगाहों को रूला बैठी

जिस दिल पे इश्क का दाग है

ठेस न लग जाए नाजुक दिल को

तेरी बंदगी अब तेरी गली में

उल्फत में जान निकल जाए

तेरी तस्वीर बनी थी उसमें

दर्द ने कैसी ये लगन लगाई

इश्क में दिल को ठेस लगाना

तुझे देखे बिना कभी जी न सके

तू मेरे जख्म पे न आंसू बहा

दिलकश शायरी 41-50

तेरा मासूम सा चेहरा बड़ा ही बेवफा था

तेरी नजरों में जब समाया तो

तेरे बिन जिएं हम किस तरह

ये इश्क की डगर है जहां

जिनको तन्हाई का सहारा है

याद रहा चेहरा दिलबर का

दुख ही तेरा साया है

आज भी खोया तेरे खयालों में

हंसने की कभी सूरत न हुई

आज की रात बरसेगा रातभर

दिलकश शायरी 51-60

रोशनी हुस्न की पायी जबसे

ढ़ाई अक्षर प्रेम का पढ़के

इन भरी आंखों से दुआ न दो

दुख सहते हैं हम जिनके लिए

जो भी होठों से न कह पाए

जुल्म करती है जब मुझपे तन्हाई

आग लगी है रूह के धागे में

जो मुहब्बत में दर्द पाते हैं

आज भी उसने बड़ी खामोशी से

इस मुसाफिर का कोई दर्द तू क्या जाने

दिलकश शायरी 61-70

कभी नाम तेरा लबों पर जो आया

तुम्हें खूब आता है उल्फत निभाना

सभी बेगाने हैं, दुनिया में तेरा कोई नहीं

लगा था सीने में इश्क का खंजर

करीब आके मुस्कुरा कर चले जाना

आहों को दिल से निकल जाने दो

टूट जाते हैं यहां पे सदियों के रिश्ते

दिल में हर गम छुपा कर रखा है

मेरी पलकों के साये में

अगर दिल में कुछ गिला रखना

दिलकश शायरी 71-80

क्यूं परेशां हो ऐ आवारा दिल

तुमसे मिलन की चाहत में

दर्द खुद को ही यूं मिटाता है

अपनी यादों के टूटे आईने में

पास आके वो यूं गुजर गए

आंसू की दरिया पे चले हम

ऐ नादां मुहब्बत तू मुझको ऐसे ना रुला

जितने प्यासे हैं, उतना ही दूर सागर है

मुझमें आता है मेरा यार आंसू बनकर

तूने आशिकी में मेरे दिल के टुकड़े किए

दिलकश शायरी 81-100

तेरा दिल मुझपे आशना तो हो

बह गए आंसू कतरा-कतरा

मेरा इश्क भी, तेरा हुस्न भी

शायद दोनों जुदा हो जाएं

ये खामोश दर्द, ये खामोश आह

मैं तो टूटा आईना हूं

सावन आया हर रातों में

इश्क का है एक तजरबा

हर दामन में शोला है

आप जब तक मेरे कातिल हैं

मौत से इश्क को मुहब्बत है

दिल लगाना भी सजा होता है

इश्क का अच्छा इम्तिहान रहा

दर्द कम न हो कभी इस दिल में

जो भी खोया था वो याद आया

जान में भी तू ही बसी है

हुआ फूलों का कत्ल अभी

दर्द की बज रही है शहनाइयां

 

 

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