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गुनाह की सजा शायरी

आखिर उससे मोहब्बत कैसे हासिल हो
जब मुझे एक पल की बेवफाई नहीं देती

मुझे किस गुनाह की सजा दे रही हो तुम
पूछता हूं मगर वो कभी सफाई नहीं देती शायरी

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