शायरी – वो दिल से जलता रहा, जिस्म से बुझता रहा

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गर्दिशे-इश्क में एक जुगनू चमकता रहा
वो दिल से जलता रहा, जिस्म से बुझता रहा

उसके आंसू लफ्ज बने, उसकी खामोशी राग बनी
वो नगमा बन गूंजता रहा, खुशबू बन उड़ता रहा

इस दुनिया की नजर में वो गुमनाम रहा
वो रात को जगता रहा, दिन को सोता रहा

वो मुफलिस था, बर्बाद था और बहुत बदनाम था
मगर दिल की दुनिया में वो जीता-मरता रहा

एक दर्द की दरिया बहता रहा उस सागर में
वो जुगनू एक शायर था, सदियों तक चमकता रहा

©RajeevSingh

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