ख्वाब प्यार इमेज शायरी

शायरी – शबनम तेरे सागर की एक बूँद ही तो है

इश्क में आशिक और माशूक के बीच का रिश्ता रोशनी और परछाई का होता है। आस्मा के दिल में जो चांद रोशन है, वो किसी की परछाई है। महबूब की रोशनी पाकर ही आशिक की जिंदगी का अंधेरा छंटता है।

दिल के अंदर जज्बातों का एक समंदर हैं। वो दर्द का समंदर भी महबूब का दर्द बनाता है। दिल में उठने वाली लहरें आंखों से छलकती हैं। आंखों से होने वाली यही बारिश इश्क की जुबां होती है जिसके जरिए यह जाहिर होता है कि यहां मोहब्बत है।

तेरी सांसे शायरी इमेज
तेरी सांसों की हवा जो लग जाए
ये दिल की आग तो भड़क जाए

जिंदगी कितने ख्वाब दिखाती है। ऐसा लगता है जैसे ख्वाब रोज नया एक तमाशा दिखाती है और हम जिंदगी के मेले में खो सा जाते हैं। ये इश्क का मेला, ख्वाहिशों का तमाशा आशिक को दुनिया में गुमनाम सा कर देता है।

इश्क में जिंदगी वीरान सी हो जाती है। इस वीरानी में ख्वाहिशों के कई मजार हैं जिन पर आशिक रोज शम्मे जलाता है। रात यादों का शहर बन जाता है और ये शहर श्मशान सा नजर आता है जहां दुनिया की मजबूरियों में हर ख्वाहिश की लाश जलती नजर आती है।

इश्क की रोशनी एक तरफ जिंदगी को रोशन करती है तो दूसरी तरफ अगर मुकम्मल न हो तो जिंदगी को जलाती भी है। जिगर में दर्द की जलन सी होती है। इन्हीं अहसासों में डूबी हुई यह गजल जिसमें मोहब्बत के गहरे दर्द का बयां है। यह गजल इश्क की आग की वो जलन है…

रू-ब-रू आग के जब आईने बन गए
आस्मा के दिल में तब एक चाँद बन गए

शबनम तेरे सागर की एक बूँद ही तो है
वही बूँद मेरी आँखों की जुबां बन गए

ख्वाबों के तमाशों से हम उबर नहीं पाए
इस मेले में खोकर यूँ गुमनाम बन गए

मजारों पे कितने ही शम्मे जलाए हमने
यादों के शहर भी अब श्मशान बन गए

©RajeevSingh

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