इधर हमसे रोज तुम वफा

वफा की शायरी

मेरी जिंदगी में तुम लेकर आई बहार
अब खुद जुदाई की खिजां मांगती हो

मेरे दुश्मन की हमसफर बनोगी मगर
हमसे भी दोस्ती की रजा मांगती हो

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