हुस्न ओ इश्क शायरी

शायरी – मेरी तन्हाई मिटाने वाला कोई नहीं

जब इश्क होता है तो इंसान तन्हा हो जाता है। उसका महबूब पास हो बस इसकी ख्वाहिश ही उसको तन्हा बना देती है। दुनिया की भीड़ में भी इंसान अकेला महसूस करने लगता है क्योंकि वहां उसको कोई प्यार करनेवाला नहीं और न ही कोई है जिसे वो प्यार दे सके।

तन्हाई का यह अहसास धीरे-धीरे बढ़ने लगता है और प्यार की तलाश कर रहे आशिक को लगता है कि अब उसकी तन्हाई को मिटाने वाला नहीं मिलेगा शायद। ऐसे में कौन उसका साथ निभाएगा, वो तो हमेशा अकेला ही रह जाएगा।

तन्हाई उस सन्नाटे की तरह है जो जंगल में छाया रहता है। उस सन्नाटे में दूर-दूर ऐसा लगता है जैसे कहीं कोई भी नहीं। एक पत्ता हिलानेवाला भी कोई नहीं जिसकी आवाज से ऐसा लगे कि हां कोई पास है।

तन्हाई की शायरी इमेज
जिंदगी एक तरफ है मेरी तन्हाई में
और तू एक तरफ दर्द की अंगड़ाई में

वो जैसे सीने से आंचल को लगाकर चलती है, आशिक ठीक उसी आंचल की तरह हो जाना चाहता है लेकिन महबूब के बगैर बेसहारा महसूस करता है और कहता है कि उसको सीने से लगानेवाला कोई नहीं।

तन्हाई रात में और गहरी होती जाती है और नींद आंखों से दूर। अंधेरी रात में हुस्न का चिराग नहीं जलता तो आशिक को वो तन्हाई बहुत रुलाती है। उसे उस हुस्न की तलाश रहती है जो उसकी रातों को रोशन कर दे।

तन्हाई के इन्हीं गहरे अहसासों से यह गजल निकली है जिसमें रात में जागते हुए आशिक निराश हुआ जा रहा है और उसे लगता है कि ये तन्हाई ही शायद उसकी तकदीर बनकर रह जाएगी।

मेरी तन्हाई मिटाने वाला कोई नहीं
अब मेरा साथ निभाने वाला कोई नहीं

इतना सन्नाटा पसरा है इस जंगल में
एक पत्ता भी हिलाने वाला कोई नहीं

ये बदन है बेसहारा आंचल की तरह
इसको सीने से लगाने वाला कोई नहीं

दो घड़ी में ये अंधेरी रात गुजर जाएगी
हुस्न का चिराग जलाने वाला कोई नहीं

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

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