शायरी – इस जमाने में मेरी भी दास्तां होगी

देखिए जाने कहां अपनी इन्तहा होगी

इश्क में फिर से कौन मेहरबां होगी

 

हमको गहरी नींद से अरे ओ जगानेवाले

मैं जगा दूं तुझे तो ये मेरी खता होगी

 

जान जाएगी तेरे इश्क में तो ये होगा

इस जमाने में मेरी भी दास्तां होगी

 

बाज न आएगा तू मुझपे सितम ढ़ाने से

जाने कब तेरे रहम की इब्तदा होगी

(इब्तदा- शुरुआत)

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