शायरी – उस नाज पे, उस हुस्न पे जांनिसार हों हर जनम में हम

love shayari hindi shayari

कभी दिल्लगी कभी संगदिली, कितने सितम तुमने किए
कभी की वफा, कभी थी खफा, कितने करम तुमने किए

उस हुस्न के दीदार पे जांनिसार हों हर जनम में हम
जो रूह बनके जुदा हुई, इस जनम में जां उसने लिए

ये इश्क का इंसाफ है, कि तेरी हर खता मुआफ है
इस गुनाह को कुबूल कर खुद को सजा हमने दिए

ये चांद भी तेरे नूर का एक मिसाल है इस जहां में
हम रातभर यूं ही जागकर तुझे देखकर जीते गए

©RajeevSingh #love shayari

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