चांद का कातिल शायरी ईमेज

कातिल इश्क शायरी ईमेज

आखिर रात का बादल ही चांद का कातिल बनता है
सोचता हूं कि तेरे बिन अब इन रातों की सुबह न हो

दिल भी तेरा, हम भी तेरे, जपते हैं ये सांझ सबेरे, कब आओगे तुम आंखों में, कब होंगे मेरे सपने पूरे, तुमसे मिलने की तमन्ना, तुम बिन हम आधे अधूरे।

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