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शायरी – जब कभी मुझको याद आती हो

जिंदगी की तन्हाई जब रुलाती है तो उसकी ही याद दिलाती है। वो प्रेम जो कहीं खो गय इस समाज की साजिशों में, अपने घरवालों की ख्वाहिशों में। वो प्रेम जो उलझकर रह गया जब फैसला लेने की घड़ी आई। तभी आाशिक ने लिखा कि तुम्हारी जब-जब याद आती है तो दिल में आग सी लग जाती है।

तन्हाई के दर्दभरे अंधेरे घेर लेते हैं। हर तरफ खामोशी ही खामोशी..घर में  खामोशी…दरो दीवार में खामोशी, जुबां पे खामोशी, जिस्म में खामोशी..और इस खामोशी में जैसे लगता है कि तुम मुझे रुला रही हो। मेरी आंखों से बह रहे आंसू तुम पर इल्जाम लगाते हैं कि इस खामोशी में तुम ही आंखों में ये समंदर ला रही हो।

किस्मत में चैन शायरी ईमेज
अपनी किस्मत में कभी चैन का नाम नहीं
नींद आती है न कभी वक्त पे जाकर

और ये दिल उन आंसुओं को पीता जा रहा है। कितना प्यासा है ये दिल और तेरा आशिक जिसे तुम अब भूल चुकी हो। दिल कहता है कि तुमने ठीक ही किया। शायद तुम भी यही चाहती थी कि मेरा दिल आंखों से बहते  आंसुओं को पीता रहे।

तुम न जाने किस उलझन में फंस गई, किन दरो-दीवार में कैद हो गई, किन रिश्तों की जंजीरों ने तुमको बांध लिया जो तुम मुझसे मिलने नहीं आती और न ही कभी मिलने के लिए बुलाती हो। ये गजल इस दिल ने तुम्हारे लिए लिखी है ताकि तुम कभी इसे पढ़ो तो महसूस कर सको कि तुम्हारी यादें मुझ पर क्या-क्या सितम ढाती हैं।

जब कभी मुझको याद आती हो
तुम मेरे दिल में आग लाती हो

मेरी तन्हाई के दर्दभरे अंधेरों में
खामोशी से मुझको रुलाती हो

दिल अश्कों को पीता रहे हमेशा
इसलिए प्यासे को भूल जाती हो

तुम अपनी उलझनों में फंसकर
कभी मिलने को कहां बुलाती हो

आरजू भी तेरी, जूस्तजू भी तेरी, एक तमन्ना ही रही बस ख्वाब बनकर, वो ख्वाब जो कभी पूरा नहीं होता और पूरा हो जाए तो ख्वाब नहीं रहता, हकीकत बन जाता है लेकिन तू ख्वाब ही रही। इसी ख्वाब से ये गजल निकले हैं जो तेरी ही कहानी कहते हैं।

©राजीव सिंह शायरी

 

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