शायरी – दर्द लिखता है तेरे हुस्न के कयामत को

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दर्द लिखता है तेरे हुस्न की कयामत को
दिल तड़पता है तेरे दर्द में मर जाने को

हर अमावस पे जब चांद नहीं दिखता है
मैं तरसता हूं निगाहों का नूर पाने को

तेरी सूरत ने संवारे थे आईने मेरे
तेरी खामोशी ने तोड़ा है दीवाने को

शाम तेरी बुझी निगाहों सी आती है
हम आए हैं तेरी पलकों में डूब जाने को

©RajeevSingh

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