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जख्मी यादें शायरी

जाने क्या हुई खता जो तुम हुए इतने खफा
हमसे बेरुखी की वजह पूछ रही हैं वो यादें

तुमसे फिर मिलने को दिल बहुत चाहता है
इसी कोशिश में जख्मी हुई जाती हैं वो यादें

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