शायरी – हंसते हुए मेले में, रोता ही रहा आशिक

अब दिल की वादी में रहना है मरते दम तक

अपना दर्द ही हमको लिखना है मरते दम तक

 

ये इश्क हुआ जिनको, दुनिया में न जी सका वो

उनसे ही अपना रिश्ता रखना है मरते दम तक

 

हंसते हुए मेले में, रोता ही रहा आशिक

उनके ही संग हमको रोना है मरते दम तक

 

मेरे दिल की तन्हाई में आते हो मेरे महबूब

तेरे अहसास में अब बसना है मरते दम तक

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