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तेरे इश्क में शायरी

तेरी याद से परहेज न कर सका कभी
रोग बढ़ता ही जा रहा है तेरे इश्क में

जीने वाले लोग ये समझ ही नहीं पाते
क्यों बेकार में मर रहा हूं तेरे इश्क में

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