शायरी – दिल के घर में चुपके से वो

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हमने ही तो आग लगाई
बेशक उसने थी सुलगाई

दिल के घर में चुपके से वो
एक दीया थी लेकर आई

जलकर खाक हुआ फिर भी
हमने उसकी जान बचाई

मरकर चला गया दीवाना
तुम देने नहीं आई विदाई

©राजीव सिंह शायरी

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One thought on “शायरी – दिल के घर में चुपके से वो”

  1. रोता वही है जिसने महसूस किया हो सच्चे रिश्ते को..
    वरना मतलब के रिश्तें रखने वाले को तो कोई भी नही रूला सकता..

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