शायरी – गैरों से कैसे कहूं मैं दिल की बातें

वक्त की आंख से आंसू सा गिरा लम्हा है

दूर तक बहती हुई हर दरिया तन्हा है

 

आशियां में वो रहती थी दुल्हन बनकर

जबसे वो छोड़ गई है, आईना तन्हा है

 

इतने बादल हैं मगर एक भी बरसा नहीं

कारवां जा रहा है, आसमा तन्हा है

 

गैरों से कैसे कहूं मैं दिल की बातें

सारी दुनिया है दुश्मन, आशना तन्हा है

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