शायरी – दर्द की रोशनी बाकी है मेरे दिल में अभी

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जो खामोशी से सुलगता हो किसी पत्थर में
वो आफताब तन्हा सा नजर आता है

मेरे आंसुओं को पोछे हैं जिस आंचल ने
उसका दामन मुझे खाली सा नजर आता है

दर्द की रोशनी बाकी है मेरे दिल में अभी
जलती शम्मा में अब चांद नजर आता है

किसी रेगिस्तां की तलाश में भटकता है जो
वही प्यासा मुझे दीवाना नजर आता है

आफताब – सूरज

©RajeevSingh

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