शेर ओ शायरी – कुछ अरमां आंसुओं में भीगे हैं

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तेरे आंचल की हवा जो लग जाए
ये दिल की आग तो भड़क जाए

कुछ अरमां आंसुओं में भीगे हैं
जाने कब किस घड़ी दहक जाए

चांद पाने की अब जरूरत क्या
जब तुझे देख अक्स चमक जाए

गुलाबों जैसे तेरे इन खयालों में
मुहब्बत भरी ये रात महक जाए

©rajeev singh shayari

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