100 दो लाइन दर्द भरी शायरी

दो लाइन दर्द भरी शायरी

 

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दो लाइन  शायरी 31-40

तेरी आशिक नजर पे कुरबान हो गई

मोम से ये वजूद मेरा बहुत जल्दी पिघलता है

जिधर देखिए दिलवालों की नाकामी है

उसे रिश्तों के नाम से लग जाता डर सा है

अब तेरे सामने मैं कोई सच नहीं कहता

तेरी बाहों में बस जाऊं, और मेरी मंजिल है क्या

खुदा ही था जिसने बचा लिया

कितनी अंधेरी रातें तेरी याद में कटी

कभी देख न पाऊं शायद तेरी एक झलक

वो फूल जो जिंदगी में बहार ले आती है

दो लाइन दर्द भरी शायरी 41-50

 

फिर भी पैदा हो रहे लैला मजनू बस्ती में

तुम्हारे गमों से भला वो कैसे परहेज करे

अपनों ने ही इस कदर मेरी जिंदगी का गला घोटा

तन्हा सफर को मंजिल मिले

वो फिर से लौट आएगी कभी

 शहर की राहों में रोज मिल जाते हो तुम

हर कोई जान गया पर तुम तक बात नहीं पहुंची

तुमसे जुदा होकर मेरे पास क्या रह जाएगा

देखो तो कितनी खामोश हूं मैं

कोई मेरे दर्द को समझता नहीं है ऐ खुदा

दो लाइन दर्द भरी शायरी 51-60

 

तू तो अपने आशिक की जिंदगी बदल न सकी

 मैं बहुत परेशां हुआ खुद को बनाने में

थाम लेते हैं कलेजे को हम जुदाई में

.तेरी खुशी के लिए समझौता किया वरना

ऐसा दिल किसी दीवाने में रहता है

जानता हूं तुमको किसी आशिक की तलाश है

तुम्हारे बिना खुशी का चिराग जलता नहीं

अपने ही लहू से लिखेगा मेरा नाम

ना सीख तू ये दिलबर, मेरी राह तू भी चुन ले

दो लाइन दर्द भरी शायरी 61-70

 

कब मिलेगी वो दुनिया में, किन गलियों में

किस दिल में मिलता है इस जहान में वफा

अब ये गुमां न रहा कि आईना है दिल मेरा

तुम ऐतराज करोगे यही डर है मुझको

एक हुस्न का दीया दिल में जलता रहा

 मैं इश्क में जला और तुमको गम न हुआ

 कितने शम्मे जलाए दिल ने यादों के

हमने देखा था खुद को तेरी सूरत में

 आसमा दे न सका चांद अपने दामन का

 दिल की बातों को न करना, मेरे बस की बात नहीं

दिल आंसू भी बहाए तो कोई बात नहीं

दो लाइन दर्द भरी शायरी 71-80

 

यहां जख्म देनेवाले सरेआम मिलते हैं

 इश्क के आंसुओं को रोना नहीं आता

चल पड़ी राह में दर्द का नगमा लेकर

हम जिंदगी की आग में यूं झुलस गए

नजरअंदाज करके चलता हूं इस जमाने को

किस सादगी से आए हो ऐ चांद तुम मेरे सामने

वो खुद से यूं खफा हुआ, मेरी जिंदगी से चला गया

जला चिराग कि कब तक न जाने रात रहे

तूने हाथों में लगाए हैं गैरों से हिना

दोस्ती तो बस एक तमाशा है

दो लाइन दर्द भरी शायरी 81-90

 

वो मुझसे बिना पूछे मेरा खून पी गया

तू जुदा हुई तो ये हुआ मेरे साथ तेरा दर्द है

खुशनसीब हूं कि तेरी मोहब्बत मिल गई

दूर मंजिल है तेरी आंख में काजल सा

लंबी उमर थी लेकिन तेरे इश्क में

उम्र गुजरी है दिल को ही जलाने में

खोजते रह गए लेकिन मुहब्बत न मिली

 गम ही खाता हुआ और दर्द को पीता हुआ

दुनिया में मोहब्बत का कतरा न मिला हमको

दो लाइन दर्द भरी शायरी 91-100

 

टूट जाएगा ये आईना, छूट जाएगा जिस्म

तुझे छूने की हसरत को भुलाया न गया

आशिक मरता रहा तेरे दर पर आकर

मेरी खाक को आंचल में बांध लेना तुम

तुम मेरी निगाहों पे नकाब बन गए

तू मान जा धनवान से अपनी सगाई के लिए

याद आता है मुझे उसके जूड़े का बंधन

नहीं जानता बेवफाओं से क्या रिश्ता हमारा

वो अगले ही पल मेरे दुश्मन बन जाते हैं

एक गम हैं सौ तरह के, झेलकर मैं मर गई

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