शायरी – गम न खाते तो वो हमसे खफा हो जाते

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गम न खाते तो वो हमसे खफा हो जाते
हमें डर था कि कभी वो बेवफा हो जाते

इंतजार था अपने जख्मों के भर जाने का
एक पल के लिए तो कभी वो दवा हो जाते

जमाने में तो इस तन्हा का दम घुटता है
दिल भी जी लेता जो कभी वो हवा हो जाते

उनकी खातिर ही हम रोज गजल लिखते हैं
इसे पढ़ते तो शायद कभी वो फिदा हो जाते

©राजीव सिंह शायरी

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