शायरी – जबसे तुम मेरी जिंदगी में चली आई हो

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न जाने कबसे तेरी तलाश में भटक रहा हूं मैं
अब जो मिली हो तो दिल में मटक रहा हूं मैं

मेरी हर बात पर तुम इस तरह हंसती हो
देखो दुनियावालों की नजर में खटक रहा हूं मैं

मुझे उतारकर मेरी जान तुम कब पहनोगी
तेरी खूंटी पर जाने कबसे लटक रहा हूं मैं

जबसे तुम मेरी जिंदगी में चली आई हो
तबसे महफिल भूल कमरे में अटक रहा हूं मैं

©RajeevSingh

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