शायरी – हो इश्क का तमाशा और हुस्न की कयामत

love shayari hindi shayari

हो इश्क का तमाशा और हुस्न की कयामत
ऐसे में दिल-ए-आशिक कैसे रहे सलामत

एक बूंद दर्द में डूबा, तब बन गया समंदर
किसी बेवफा ने की थी उसपे कभी इनायत

सब सूख चुकी हैं वो गुलाब की पंखुरियां
संभाल के रखा था आखिरी तेरी अमानत

आंखों में जमा होके गिले-शिकवे हुए पानी
चेहरे पे बहता दरिया, आईने की है शिकायत

©RajeevSingh # love shayari

 

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