शायरी – देखा है किसी के दर्द में टूट-बिखरकर

new prev new next

मैंने देखा है किसी के दर्द में टूट-बिखरकर
रह गया दुनिया से और उनसे महरूम होकर

इक तरफ बुझा चिराग, दूसरी तरफ तन्हाई
इक उम्र गुजार दी उस नूर के लिए रो-रोकर

जीने की तमन्ना थी, संग रहने की चाहत थी
लेकिन सहते रहे दर्द उसका नाम लेकर

जुदाई के आलम में गुजर गई मेरी जिंदगी
पीते रह जहर को मोहब्बत का अंजाम कहकर

©RajeevSingh

Advertisements

One thought on “शायरी – देखा है किसी के दर्द में टूट-बिखरकर”

  1. Hum hum hai nahi likin hum o hai ki jo o hum hai hi magar hum hum hai to duniya me kuoo hooo………………..

Leave a Reply

Your email address will not be published.

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.