शायरी – जवानी ये कैसी खता करा बैठा

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जाने क्या सूझा, जवानी ये कैसी खता करा बैठा
कमजर्फ बेवफा की दिल्लगी से दिल लगा बैठा

बरसों में बनाई थी उसने दुनिया में जो इज्जत
उसे एक पल में कमसिन के हाथों लुटा बैठा

हसीना ने हंस हंस के जमाने में बदनामी की
वह शख्स किसी कोने में खुद को छिपा बैठा

अब रोता है वो अपनी करतूत और किस्मत पर
कि क्यों मासूम चेहरे पर कदम डगमगा बैठा

कमजर्फ – ओछा

(एक उम्रदराज इज्जतदार आशिक से प्रेरित शायरी, जिसकी कमउम्र बीवी ने उसे दुनिया में बदनाम किया। )

©RajeevSingh

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