शायरी – मेरी आंखों के आंसू पे इतने सवाल करती हो तुम

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खो गया हूं किधर मुझको भी अब, ये मालूम नहीं
रिश्तों के भंवर में डूब गया मैं कब, ये मालूम नहीं

मैं ऐसी जगह पहुंचा जहां सुकूं नहीं मिलता कभी
मेरे हालात पर हंसते हैं क्यों सब, ये मालूम नहीं

सब कुछ यहां मिलता है मगर ये गम रह जाता है
किस किसको प्यार मिलता है रब, ये मालूम नहीं

मेरी आंखों के आंसू पे इतने सवाल करती हो तुम
कैसे बताऊं क्या है रोने का सबब, ये मालूम नहीं

©राजीव सिंह शायरी

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