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अपने होने का अहसास शायरी

रोशनी आती नहीं जिंदगी में कुदरत की
शहर में चांद सूरज बदहवास बुझ जाए

दूर निकल आया हूं अब खुद से कितना
कि अपने होने का भी अहसास बुझ जाए

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