शायरी – प्रीत में जोगन बन जाऊंगी मैं

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प्रीत में जोगन बन जाऊंगी मैं
तोरी नगरी पिया चली आऊंगी मैं

घर की दीवारें तो तोड़े नाही टूटे
अपनी देहरी मोसे जाने कब छूटे
पिंजरे को तजके उड़ जाऊंगी मैं
तोरी नगरी पिया चली आऊंगी मैं

नगरी में आके पिया तोरे दर पे
धूनी रमाऊंगी मैं दिल की अगन से
हवन की लकड़ी बन जाऊंगी मैं
तोरी नगरी पिया चली आऊंगी मैं

©RajeevSingh

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