हीर रांझा – 18 – हीर के खिलाफ चाचा कैदु की साजिश

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हीर गुस्से से उबल रही थी। वह कैदु पर चिल्लाते हुए बोली, ‘तू रांझे को धोखा देकर खाना ले आया लेकिन मुझसे कैसे बचेगा। अपनी जान की खैर चाहते हो तो लौटा दे मुझे खाना, नहीं तो तेरे हाथ-पैर बांध कर पेड़ से लटका दूंगी। औरतों से झगड़ा मोल मत लो।’

कैदु हीर से किसी तरह से खुद को बचाता खाना लेकर भागा और सीधे गांव पहुंचा। गांव के बड़े बुजुर्गों की पंचायत में कैदु खाना दिखाकर कहने लगा, ‘देखो, इसे खिलाने हीर रोज रांझा के पास जाती है। क्या अब भी तुमलोग मेरी बात पर यकीन नहीं करोगे। हीर पूरे गांव को बदनाम कर देगी। अरे, कोई उसके बाप चूचक से क्यों नहीं कहता कि बेटी को बांध कर रखो। चूचक को तो उस दिन पर पछतावा करना चाहिए जब उसने इस चरवाहे को काम पर रखा था। क्या उसका दिमाग घास चरने चला गया था।’

कैदु की बात सुनकर पंचायत के लोगों ने जाकर चूचक को सारी बातें बताई। चूचक कैदु को कोसने लगा। ‘कैदु झूठी कहानियां बनाता रहता है। उसके पास करने को और कोई काम नहीं है। दिनभर मक्खियां मारता रहता है। चोगा पहन लेने से क्या वो फकीर हो जाएगा। वह हीर के खिलाफ अपनी जुबान से आग क्यों उगल रहा है। हीर जंगल में अपनी सहेलियों संग खेलने जाती है।’

लेकिन गांव की औरतें चूचक की इस बात का मजाक उड़ाते हुए हीर की मां से कहने लगीं, ‘तुम्हारी बेटी खराब हो रही है। उसकी करतूतों से हम सबका कलेजा जलता है। उसकी बेशरमी की चर्चे पूरे इलाके में हो रहे हैं। अगर हम कुछ कहें तो हम पर वो चिल्लाने लगती है। उसका घमंड तो राजकुमारियों जैसा है। मस्जिद जाने के बहाने वह जंगल जाकर कोई और ही पाठ पढ़ती रहती है। हीर की वजह से हमारी बेटियां भी खराब हो जाएंगी।’

अब कैदु हीर की मां से कहने लगा, ‘भगवान के लिए अपनी बेटी की शादी कर दो। काजी हमेशा कहता रहता है कि इस बहकी हुई लड़की की शादी हो जानी चाहिए थी। नहीं तो फिर उसके टुकड़े-टुकड़े कर दो और गांव को बदनामी से बचाओ।’

लोगों के ताने सुनकर हीर की मां आपा खो बैठी। उसने तुरंत हीर को बुलाने के लिए घर में काम करने वाली मीठी को भेजा। हीर मां के पास हंसते हुए आई और बोली, ‘मां, देखो मैं आ गई।’

हीर की मां गुस्से में बोली, ‘बेशरम लड़की, इस प्रेम कहानी के लिए तो तुमको बहते दरिया में फेंक देना चाहिए। जवान लड़की जो पिता के घर से बाहर कदम रखे उसे कुएं में डुबोकर मार देना चाहिए। तुम अपने प्रेमी के लिए इतनी उतावली हो हीर, अब तुम्हारे लिए पति लाना होगा। अगर तुम्हारे भाई यह जानेंगे कि तुम क्या गुल खिला रही हो तो वो तुम्हारे गला घोंट देंगे या तलवार से काट डालेंगे। अपने परिवार का नाक क्यों कटा रही हो हीर।’

हीर की मां मीठी से बोली, ‘मीठी, हीर के सारे जेवर उतार लो। ऐसी बेटी को जेवर देकर क्या फायदा। यह पूरे झांग सियालों के सम्मान को ठेस लगाने पर तुली है। उस चरवाहे को तो हम आज ही निकाल देंगे।’

मां की बात सुनकर हीर बोली, ‘मां, ये तो खुदा की इनायत है कि उसने तुम्हारे घर ऐसे चरवाहे को भेजा। इस खजाने के लिए तो पूरे समाज को खुदा का शुक्रिया करना चाहिए। हमारे पास तो किस्मत खुद चलकर आया है। तुमलोग मेरे प्यार पर इतना हंगामा क्यों खड़ा कर रहे हो। क्या तुम्हें पता नहीं कि आग, दर्द और प्यार को छिपाकर रखा जाता है।’

हीर ने मां-बाप के सामने रांझा को ठुकराने से इंकार कर दिया। हीर की मां ने पति चूचक से कहा, ‘देखो, तुम्हारी बेटी आज मां-बाप को आंखे दिखा रही है। हमारे सारे रिश्तेदार तो इसी मौके की तलाश में बैठे हैं। वह अब इस बारे में चटखारे लेकर बातें करेंगे और हम पर ताना मारेंगे। इस लड़की ने सियालों की इज्जत को धूल में मिला दिया।’

चूचक गुस्से में बोल पड़ा, ‘दूर ले जाओ इस लड़की को मेरे सामने से। इसे धक्का देकर गांव से बाहर फेंक आओ। यह नफरत के ही लायक है। जनम लेते ही इसको जहर दे देना चाहिए था।’ कहानी आगे पढ़ें

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